केंद्रीय आम बजट 2018-19

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2018-19 का आम बजट संसद में पेश किया. वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद यह पहला बजट है. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार का यह पांचवां और लोकसभा चुनाव से पहले आखिरी पूर्ण बजट है. इस वर्ष भी रेल बजट अलग से पेश नहीं किया गया, क्योंकि वित्त वर्ष 2017-18 से ही रेल बजट को आम बजट में शामिल कर दिया गया है.

इस बजट में, वित्त मंत्री ने मुख्य रूप से किसानों की आय बढाने के साथ-साथ रोजगार सृजन, चिकित्सा सुबिधा, शिक्षा, विकास दर और वित्तीय अनुशासन पर ध्यान दिया है.

Union-Budget-2018-19

रुपया कहाँ से आया और कहाँ गया

वित्त वर्ष 2018-19 के बजट के अनुसार सरकार की आमदनी और खर्च का ब्योरा प्रतिशत में इस प्रकार है:

आमदनीखर्च
ऋण से इतर पूंजी प्राप्तियां: 3%

कर से इतर राजस्व: 8%

माल एवं सेवा कर और अन्य कर: 23%

केन्द्रीय उत्पाद शुल्क: 8%

सीमा शुल्क: 4%

आय कर: 16%

निगम कर: 19%

उधार और अन्य देयताएं: 19%।

ब्याज: 18%

रक्षा: 9%

सब्सिडी: 9%

वित्त आयोग और अन्य खर्च: 8%

करों और शुल्कों में राज्यों का हिस्सा: 24%

पेंशन: 5%

केन्द्रीय प्रायोजित योजनाएं: 9%

केन्द्रीय क्षेत्र की योजना: 10%

अन्य खर्च: 8%

कृषि और किसानों का विकास

वित्त मंत्री ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने पर बल दिया है. इसके लिए खरीफ़ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को 1.5 गुना किया गया है. किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य मिले इसके लिए दो हजार करोड रूपये की लागत से 22 हजार ग्रामीण बाजारों का ढांचागत विकास विकास किया जायेगा. इसके साथ ही आलू, टमाटर और प्याज के लिए 500 करोड़ रुपये की लागत से ‘ऑपरेशन ग्रीन’ योजना शुरु किया जायेगा. वित्त मंत्री ने इसके अलावा कृषि प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए 1400 करोड़ रुपये देने का भी ऐलान किया है. साल 2018-19 में कृषि के लिए इस बजट में 11 लाख करोड़ रुपए का ऋण प्रस्तावित किया गया है.

जैविक खेती और महिला समूहों को जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. साथ ही कृषि उत्पादों के निर्यात को 100 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. वित्त मंत्री ने कहा कि 470 कृषि उत्पाद बाजार समितियों को ईनैम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) नेटवर्क से जोड़ा गया है, बाकी को मार्च 2018 तक कनेक्ट कर लिया जाएगा.

जिला स्तर पर विशिष्ट कृषि उत्पादन का कलस्टर मॉडल विकसित किया जायेगा तथा किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा मत्स्य पालन और पशु पालन के लिए भी दी जायेगी. फलों और सब्जियों को नष्ट होने से बचाने तथा खाद्यान्नों के मूल्य संवर्धन के लिए 42 मेगा फूडपार्क कार्यान्वयन किया जायेगा.

गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों का विकास

वित्त मंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए कहा कि सौभाग्य योजना के तहत चार करोड़ गरीब घरों को मुफ्त बिजली दी जाएगी. गांवों में बुनियादी सुविधाएं को मजबूत करने के लिए 14.34 लाख करोड़ रुपये दिए जाएंगे. उज्ज्वला योजना के तहत 5 करोड़ से बढ़ाकर अब आठ करोड़ गरीब महिलाओं को मुफ़्त गैस कनेक्शन दिया जाएगा. ग्रामीण क्षेत्रों में पांच लाख वाई फाई हाट स्पॉट और एक लाख ग्राम पंचायते हाईस्पीड ब्रॉडबैंड से जुडेंगी. इसके लिए 10 हजार करोड़ का आवंटन किया गया है. साथ ही उज्जवला योजना का लक्ष्य 5 करोड़ से बढ़ाकर 8 करोड़ कर दिया.

रोजगार बढाने के उपाय

रोजगार को लेकर इस बजट में वित्त मंत्री ने 70 लाख नई नौकरियां पैदा करने का ऐलान किया है. इसके साथ-साथ 50 लाख युवाओं को नौकरी के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा.

स्वरोजगार को प्रोत्साहन देने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत आगामी वित्त वर्ष के लिए तीन लाख करोड़ रुपए धन का आवंटन किया है. मुद्रा योजना के तहत नए और पुराने उद्यमियों को रियायत दर पर 50 हजार से लेकर पांच लाख रुपए तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है.

मछली पालन और पशुपालन व्यवसाय में 10000 करोड़ रुपये देकर ग्रामीण क्षेत्रो में जनता की आय बढ़ाने की कोशिश की जाएगी. फुटवियर और चमड़ा उद्योग को नए रोजगार उपलब्ध कराने पर दी जाने वाली कर रियायत दी जाएगी.

शिक्षा का उन्नयन

इस बजट में वित्त मंत्री ने नवोदय विद्यालय की तर्ज पर अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए एकलव्य विद्यालय खोले जाने की बात कही है. साल 2022 तक 50 प्रतिशत एसटी आबादी वाले और 20,000 जनजातीय लोगों को नवोदय विद्यालयों के अनुरूप एकलव्य स्कूलों की सुविधा दी जाएगी. नगर नियोजन एवं वास्तुशिल्प के दो नए विद्यालय और 18 नए आईआईटी और एनआईआईटी खोलने की योजना है.

उन्‍होंने बीटेक विद्यार्थियों के लिए प्रधानमंत्री रिसर्च फेलो योजना की भी घोषणा की और 24 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज-अस्पताल खोलने की भी घोषणा की. जिला अस्पतालों की सुविधाओं का उन्नयन करके 24 नए मेडिकल कॉलेज और अस्पताल बनाए जाएंगे.

स्कूली बुनियादी ढांचे के जीर्णोद्धार के लिए ‘राइज’ योजना शुरू की जाएगी जिसके तहत अगले चार वर्षो में 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक आवंटित किए जाएंगे.

5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आर्थिक रूप से कमजोर दस करोड़ परिवारों को प्रधानमंत्री स्वास्थ्य संरक्षण योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा प्रदान करने की घोषणा की है. इस फैसले से देश के तकरीबन 50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच मिल जाएगा. यह कुल आबादी का करीब 40 प्रतिशत है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य पर व्यय का 67 प्रतिशत लोगों को अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है. जबकि केंद्र एवं राज्य सरकारों का व्यय महज 29 प्रतिशत होता है. जबकि स्वास्थ्य बीमा का योगदान 3.7 प्रतिशत है. रिपोटॅ के अनुसार स्वास्थ्य पर प्रति व्यक्ति खर्च 3826 रुपये रहा जिसमें सरकारी व्यय महज 1108 रुपये तथा निजी व्यय इसके दोगुने से भी ज्यादा 2394 रुपये रहा. यह रिपोटॅ 2014-15 में हुए स्वास्थ्य के व्यय के आंकड़ों पर निर्भर थी.

अभी राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत गरीब परिवारों को तीस हजार रुपये तक का बीमा कवर प्रदान किया जाता है. इसमें परिवार के पांच सदस्य शामिल हैं.

वेतन में वृद्धि

वित्त मंत्री जेटली ने भाषण में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रति, राज्यपाल का मानदेय बढ़ाते हुए सांसदों के वेतन को भी बढ़ाए जाने की बात कही. राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, राज्यपालों की परिलब्धियां बढ़ाकर क्रमश: पांच लाख, चार लाख और साढ़े तीन लाख रुपये प्रतिमाह की गईं. सांसदों के वेतन, भत्ते मुद्रास्फीति के अनुसार हर पांच साल में स्वतः संशोधन का नियम बनेगा.

रेल बजट

रेलवे के लिए सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए बजट आवंटन 5 प्रतिशत बढ़ा कर 1 लाख 48 हजार 528 करोड़ रुपए करने की घोषणा की है. इससे इस साल 4 हजार किलोमीटर रेल लाइनों का विद्युतिकरण किए जाने की योजना है. साथ ही 4 हजार मानव रहित वाले रेलवे क्रॉसिंग 2 साल में खत्‍म कर दिए जाएंगे. 3600 किमी रेल पटरियों को होगा नवीनीकरण. इस साल 700 नए रेल इंजन तैयार किए जाएंगे. सभी रेलगाड़ियों को वाई-फाई, सीसीटीवी और अन्य अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किये जाने की योजना है.

रक्षा बजट

इस बजट में रक्षा खर्च में करीब 8% की बढ़त की गयी है। वित्त वर्ष 2018-19 में रक्षा क्षेत्र के लिए 2 लाख 95 हजार 511 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है जो पिछले साल के 2 लाख 74 हजार 114 करोड़ रुपए की तुलना में सिर्फ 7.8% अधिक है।

रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटित 2 लाख 95 हजार 511 करोड़ रुपए में से एक लाख 95 हजार 947 करोड़ रुपए कुल राजस्व और 99 हजार 563.86 करोड़ रुपए पूंजीगत व्यय के लिए निर्धारित किए गए हैं। पूंजीगत व्यय की राशि से ही आधुनिकीकरण की योजनाओं को भी पूरा किया जाएगा। इसके अलावा वर्ष 2018-19 के बजट अनुमान में पेंशन के मद में 1 लाख आठ हजार 853 करोड़ रुपए का प्रावधान अलग से किया गया है।

कर की दरों में बदलाव

बजट वित्त वर्ष 2018-19 में इनकम टैक्‍स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इनकम टैक्‍स छूट की सीमा पहले की तरह 2.5 लाख रुपए तक की सालाना आय टैक्स मुक्त है. 2.5 से 5 लाख रुपए की आय पर 5 प्रतिशत की दर से टैक्स लगता है. इसके अलावा, इस वर्ग में 2,500 रुपये मासिक की अतिरिक्त छूट भी है, जिससे तीन लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगता है. 5 से 10 लाख तक की आय पर 20 प्रतिशत टैक्स लगता है. 10 लाख रुपये से ज्यादा की सालाना आमदनी पर अभी तक 30 प्रतिशत के हिसाब से टैक्स लगता रहा है.

वित्त मंत्री ने बजट में वेतनभोगी करदाता को राहत देते हुए 40000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन शुरू किया है. स्टैंडर्ड डिडक्शन के तहत वेतनभोगी को बिना किसी निवेश या खर्च का बिल के ही 40000 रुपये की आय पर टैक्स में छूट मिल सकेगी. यानी कुल सैलरी में से 40 हजार रुपये घटाकर इनकम टैक्स का आकलन किया जाएग.

वरिष्ठ नागरिकों को विभिन्न जमाओं पर मिलने वाले 50,000 रुपये तक के ब्याज पर कर छूट मिलेगी, पहले यह सीमा 10,000 रुपये थी.

सरकार ने कामकाजी महिलाओं के ईपीएफ हिस्सेदारी को कम करके 8 प्रतिशत कर दिया है. पहले यह करीब 9 प्रतिशत था. सरकार ने इस साल नए कर्मचारियों के लिए यह बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया है.

वर्ष 2016-17 में वार्षिक 250 करोड़ रुपये का कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए कार्पोरेट कर 30 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत किया गया है. कंपनियों के लिए कर दर कम करने से सरकार को 7,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा.

महत्वपूर्ण तथ्य

आम बजट 2018-19: मुख्य बिन्दु

  • इस बजट में वरिष्ठ नागरिकों के लिए जीवन बीमा निगम द्वारा संचालित ‘प्रधानमंत्री वय वंदन योजना में निवेश करने की सीमा 7.5 लाख रुपये से दोगुना बढ़ाकर 15 लाख रुपये की गई है.
  • भारत अब 2500 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था है और यह जल्द ही आठ प्रतिशत की विकास दर हासिल करने के मार्ग पर अग्रसर है.
  • वित्तमंत्री ने कहा कि हम जल्‍द ही दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्‍था होंगे. अभी हमारी अर्थव्‍यवस्‍था दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है.
  • अनुसूचित जनजाति कल्याण के लिए 39,135 करोड़ रुपये, अनुसूचित जाति के लिए 56,619 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.
  • वित्त वर्ष 2018-19 में 9,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण किया जाएगा.
  • दस पर्यटन स्थलों को प्रसिद्ध पर्यटन केंद्र बनाने की योजना है.
  • स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों का बजट 2018-19 के लिए बढ़ाकर 1.38 करोड़ रुपये किया गया जो 2017-18 में 1.22 लाख करोड़ रुपये था.
  • विमानपत्तन प्राधिकरण के तहत वर्तमान में 124 हवाईअड्डे हैं. देश के हवाईअड्डों की यात्री वहन क्षमता को पांच गुना बढ़ाया जाएगा.
  • वर्ष 2018-19 के लिए 80,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा गया है. 2017-18 में विनिवेश से एक लाख करोड़ रुपये प्राप्त होने का अनुमान, जो तय लक्ष्य से अधिक है.
  • वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्रों की कंपनियों के 80 हजार करोड़ की हिस्सेदारी बेच देगी.
  • वित्त वर्ष 2017-18 में राजकोषीय घाटा 3.2% से बढ़कर देश के सकल घरेलू उत्पाद का 3.5% हो गया. वित्त वर्ष 2018-19 में इसे 3.3% रखने का लक्ष्य.
  • वर्ष 2018-19 के लिये रक्षा बजट बढ़ाकर 2.82 लाख करोड़ रुपये किया गया. चालू वित्त वर्ष में यह 2.67 लाख करोड़ रुपये था.
  • एक लाख रुपये से अधिक के दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर 10 प्रतिशत कर लगाया गया है.